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राष्ट्र संवाद

हजारों वर्षों के स्वर्णिम इतिहास की थाती को संजोए भारतवर्ष की यात्रा में अनेक अहम पड़ाव आए हैं । आक्रमणकारियों और साम्राज्यवादियों के अत्याचारों के एक लम्बे दौर के बावजूद भारत ने सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक शक्ति के दम पर अपना अस्तित्व खोने नहीं दिया । इसी ताकत ने देश को लगातार संघर्ष की प्रेरणा दी और 15 अगस्त 1947 को वो ऐतिहासिक दिन आया जब एक बार फिर भारत आजाद हुआ । आजादी के इस संघर्ष में लाखों देशभक्तों ने स्वत्व की बलि दी और 15 अगस्त 1947से लेकर आज तक लगातार स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भारत मां के सपूत अपना सर्वस्व न्यौछावर कर रहे हैं । कोई भी देश अपने स्वर्णिम इतिहास के गौरव, ऐतिहासिक गलतियों के सबक और अपने वर्तमान के लिए सजग रहकर ही प्रगति और वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ सकता है । भारत के जन जन में अपने देश के लिए अटूट श्रद्धा और सम्मान है । जब स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसर आते हैं तो इस राष्ट्रभक्ति की भावना को अभिव्यक्त करने और समस्त विश्व में गुंजायमानकरने का दायित्व इस देश के नागरिकों पर ही होता है ।
राष्ट्र के इतिहास बोध के साथ वर्तमान पीढी के अवचेतन में देशभक्ति का भाव निरंतर प्रवाहित होना अत्यंत आवश्यक है । इसी दायित्व को निभाने के क्रम में डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशनस्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर प्रतिवर्ष 14 अगस्त को “राष्ट्र वंदन – शहीदों को नमन” कार्यक्रम का आयोजन करता है । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भविष्य के नागरिक नौनिहालों , कर्णधार नौजवानोंऔर जन जन के मन में राष्ट्र आराधन की लहर पैदा करना ही इस राष्ट्र-संवाद का उद्देश्य है ।