Dialogue Initiative Foundation

Home विश्व धर्म संवाद

विश्व धर्म संवाद

समस्त विश्व वर्तमान दौर में विरोधाभास, टकराव, तनाव और हिंसा की अलग अलग परिस्थितियों से जूझ रहा है । कहीं दो देशों के बीच तनाव है तो कहीं दो जातियों, नस्लों , समुदायों या धर्मों के बीच विवाद और संघर्ष के हालात हैं । आतंकवाद और धार्मिक आधार पर हिंसा को खुला समर्थन मिलना समूचे विश्व के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं ।
मनुष्य सभ्यता के उत्थान के लिए , मानवता की रक्षा के लिए, प्रकृति से सामंजस्य के लिए धर्म का विकास हुआ । यह मनुष्य़ जाति की सबसे बड़ी विडम्बना है कि उसी धर्म को आज अज्ञान और निहित स्वार्थों के कारण मनुष्यता के पतन का कारण बनाया जा रहा है । कई सदियों से विश्व के अनेक भागों में धर्म शक्ति और साम्राज्यवाद का साधन बनाया गया । धर्म के आधार पर मनुष्य को मानवता के मूल विचार से भ्रमित करने का प्रयास सैकड़ों वर्ष से होता आया है ।
इन सारी विकट परिस्थितियों के बावजूद भारत और भारत का सनातन धर्म ही एकमात्र ऐसा मार्ग रहा जिसने समस्त मनुष्य जाति को बिना किसी भेदभाव के अपनाया और सदैव सर्व-समावेशी संस्कृति को संरक्षित रखने का प्रयास किया । आज जब समूचा विश्व धार्मिक आधार पर पनप रही हिंसा और आतंक से भयग्रस्त है तब भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है । जब समूचे विश्व में धर्म की मूल भावना, उद्देश्य और आत्मा को विस्मृत किया जा रहा है तब भारत के सबसे प्राचीन सनातन धर्म के मूल को दुनिया की अन्य मान्यताओं के साथ एक बार फिर मनुष्यता के कल्याण के लिए साझा करना आवश्यक हो गया है ।
125 वर्ष से भी अधिक समय पूर्व अमेरिका के शिकागो में भारत के एक संन्यासी ने सनातन धर्म और हिंदुत्व की इसी मूल चेतना को अपने प्रखर शब्दों में दुनिया के सामने अभिव्यक्त किया था । समस्त विश्व ने उस महान संन्यासी स्वामी विवेकानंद के माध्यम से हिंदुत्व के व्यापक विचार को समझा और माना । स्वामी विवेकानंद के उस शिकागो वक्तव्य के आलोक में धर्म की वर्तमान वैश्विक स्थिति पर एक व्यापक संवाद की आवश्यकता अनुभव होती है । स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को बताया कि हिंदुत्व का मार्ग व्यष्टि से समष्टि की चेतना का मार्ग है । उन्होने विश्व के सभी धार्मिक विद्वानों के समक्ष यह सिद्ध किया कि कैसे भारत एक ही तत्व में सबको और सभी में एक ही तत्व को देखता है । यही कारण रहा है कि भारत-भूमि पर जो भी आया वह इसी का होकर रह गया ।
भारत-भूमि की आध्यात्मिक चेतना सदैव प्रवाहमान है जिसमें किसी भी विरोधाभास, विवाद, विकृति को सहज रूप से विलोपित करने की क्षमता है । वर्तमान में जो वैश्विक परिस्थितियां बनी हैं उनमें सहज रूप से ही भारत की एक सर्व-समावेशी भूमिका बनती है । आध्यात्मिक चेतना के मार्ग पर विश्व का नेतृत्व करने की क्षमता केवल भारत-भूमि में है, स्वामी विवेकानंद ने भी इसी को सिद्ध किया था । इसी भूमिका के निर्वहन के रूप में डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन “विश्व धर्म संवाद” का व्यापक विचार रखता है । इस संवाद में समस्त विश्व के धार्मिक-आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक, आकादमिक विद्वान सम्मिलित हों और भारतीय चिंतन दृष्टि की अगुवाई में धर्म – आध्यात्म का चिंतन मनन करें । इसके अन्तर्गत देश – विदेश में विभिन्न भाषाओं में स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण के पुनर्पाठ हो एवं एक विश्व कल्याण को समर्पित संकल्प के साथ समस्त मनुष्य जाति आगे बढ़े ।