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जल - संवादविस्तृत रिपोर्ट हिंदी उत्सव

 उत्साह और स्वाभिमान का प्रतीक बना हिंदी का उत्सव – 2018
नए भारत में बढ़ती-संवरती, धन-प्रतिष्ठा कमाती हिंदी का उत्सव – 2018

हिंदी गर्व की गौरव की मान और प्रतिष्ठा के साथ साथ अब भरपूर पैसे देने वाली भाषा भी है । डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन द्वारा 14 अक्टूबर, 2018,रविवार को आयोजित “हिंदी का उत्सव: नए भारत में हिंदी” नामक संवाद में प्रसिद्ध लेखक और रेडियो कथाकार नीलेश मिसरा ने यह बात कही । काँस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस संवाद का उद्देश्य इंटरनेट और तकनीक के नए भारत में हिंदी के बढ़ते महत्व को परिलक्षित करना था । संभवत: अपनी तरह का यह पहला और अनोखा आयोजन रहा जिसमें हिंदी की कथित दुर्दशा पर चिंता जताने के स्थान पर डिजिटल क्रांति के फलस्वरूप नए भारत में हिंदी के तेजी से बढ़ते महत्व और प्रभाव के कारण मीडिया, मनोरंजन, तकनीक, मुद्रण और इंटरनेट के क्षेत्र में विकसित हुई असीम संभावनाओं और चुनौतियों पर सार्थक संवाद हुआ ।

इस अवसर राष्ट्रीय शिक्षा-संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय महासचिव और प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता अतुल भाई कोठारी ने कहा कि यह हिंदी और हिंदी भाषियों के लिए उत्सव का ही समय है क्योंकि तकनीक और इंटरनेट के इस युग में ना केवल हिंदी भाषा का प्रचलन तेजी से बढ़ा है बल्कि यह बाज़ार की भाषा के रूप में विकसित हुई है जिससे भारत में लाखों लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। इस कार्यक्रम की यह विशेषता रही कि इसमें हिंदी के बलबूते पर प्रतिष्ठा के साथ साथ आर्थिक अवसर बनाने वाले युवा लेखक, अभिनेता, निर्देशक, पत्रकार, इंटरनेट उद्यमी, और वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए ।
उद्घाटन सत्र में नीलेश मिसरा एवं अतुल भाई कोठारी के साथ उपस्थित बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि वर्ष में एक दिन हिन्दी दिवस न मनाकर हर दिन हिंदीकेबढ़तेप्रभुत्व का उत्सव मनाएं।
इस संवाद में उद्घाटन और समापन के अतिरिक्त कुल छह सत्रों में अलग अलग विषयों पर विमर्श हुआ । यह सत्र दो सभाकक्षों में समानांतर रूप से सम्पन्न हुए । प्रथम सत्र में
मनोरंजनऔरहिंदीकाबाज़ारविषय पर हुए संवाद में हर हर महादेव और सिया के राम जैसे धारावाहिकों के निर्देशक अनिरूद्ध पाठक, प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता यशपाल शर्मा, रेडियो मिर्ची की प्रसिद्ध आरजे सायमा, नामचीन पार्श्व-स्वर कलाकार अनिल दत्त, और प्रसिद्ध फिल्म पत्रकार अतिका अहमद फारुकी ने वक्ता के रूप में हिस्सा लिया । हिंदी को मनोरंजन के क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाने के बारे में बात करते हुए अभिनेता यशपाल शर्मा ने कहा कि हमें ये सोचना चाहिए कि हम बोल क्या रहे हैं और कैसे बोल रहे हैं। हमें समझना होगा कि हमारी ज़ुबान कितनी मीठी है और हम कैसे उसे पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम समय के साथ चलते-चलते आगे निकल आए हैं, ऐसे में हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। वहीं, आरजे सायमा ने कहा कि सोचना ये पड़ेगा कि हम हिंदी बोलना चाहते हैं या कथित हिंदुस्तानी। ज़रूरी यह है कि हम हमारी भाषा को ढंग से पेश कर पाएं। इस अवसर पर मशहूर फ़िल्म पत्रकार आतिका अहमद फ़ारुक़ी कहती हैं कि हिंदी को बचाने की नहीं सवारने की ज़रूरत है। सिर्फ़ हिंदी जानना ज़रूरी नहीं, उसे सही तरीक़े से पेश करना सबसे महत्वपूर्ण है। पार्श्व-स्वर कलाकार अनिल दत्त ने कहा कि भाषा आज रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर रही है और नए भारत को इन अवसरों को भुनाने के लिए खुद को और तैयार करना होगा ।

डायलॉग इनिशिएटिव फाउंडेशन के संस्थापाक न्यासी राकेश योगी ने बताया कि हम हिंदी का उत्सव मना रहे हैं जो कि पारंपरिक तौर पर हिंदी की दशा-दुर्दशा पर चिंता प्रकट करने वाले कार्यक्रमों से बिल्कुल भिन्न है । इसका उद्देश्य हिंदी के मौजूदा परिदृश्य को सामने लाना है जो निश्चित तौर पर बेहद सकारात्मक है और देश के करोड़ों हिंदी-भाषियों के लिए गौरव का विषय है । हमें उम्मीद है कि इस प्रकार के प्रयासों से न केवल हिंदी को लेकर सदियों से चली आ रही भ्रांतियां दूर होंगी बल्कि हिंदी में मौजूद रोजगारपरक संभावनाओं के बारे में भी जागरुकता बढ़ेगी जिससे दीन-हीन भावना के शिकार हिंदी-भाषियों के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी ।
तीसरे सत्र में “इंटरनेट युग में हिंदी पत्रकारिता में अवसर”विषय पर संवाद हुआ जिसमें फर्स्ट पोस्ट के समूह संपादक वरिष्ठ पत्रकार बीवी राव, एनडीटीवी के वरिष्ठ संपादक प्रियदर्शन और ज़ी मीडिया के डिजिटल एडिटर दयाशंकर मिश्र वक्ता थे । बी वी राव ने कहा कि तकनीक के इस युग में समाचार के अतिरिक्त अन्य विधाओं में हिंदी के माध्यम से सफल होना अधिक आसान हो गया है । वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन के अनुसार बाषा को गौरव के साथ जोड़ना आवश्यक है तभी इसकी गंभीरता बढ़ सकती है । ज़ी मीडिया के डिजीटल एडिटर दयाशंकर मिश्र ने कहा कि नई पीढी को हिंदी के बढ़ते अवसरों के लिए स्वयं को तैयार करना होगा ।
समानांतर चल रहे चौथे सत्र में “बाज़ार और हिंदी” विषय पर संवाद हुआ जिसमें वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक मधुकर उपाध्याय, पेंग्विन इंडिया की संपादक वैशाली माथुर, यात्रा बुक्स की संपादक नीता गुप्ता , हिंदी युग्म प्रकाशन के संपादक शैलेश भारतवासी और लेखक नीलोत्पल मृणाल ने विमर्श किया । लेखक मधुकर उपाध्याय ने कहा कि हिंदी में लेखन का अनुपात लगातार बढ़ रहा है और इसको पर्याप्त पाठक भी मिल रहे हैं । यात्रा बुक्स की संपादक नीता गुप्ता ने कहा कि हिंदी के प्रकाशन उद्योगमें बहुत संभावनाएं हैं जिसके लिए हिंदी के लेखकों को अधिक तैयारी की जरूरत है । इसी बात को आगे बढ़ाते हुए पेंग्विन इंडिया की संपादक वैशाली माथुर ने कहा कि पेंग्विन का हिंदी में पुस्तकें प्रकाशित करने का अनुभव काफी अच्छा रहा है । हिंदी युग्म के संपादक शैलेश भारतवासी के अनुसार हिंदी किताबें आज भी किसी भी दूसरी भाषा से अधिक बिकती हैं और प्रतिष्ठा भी अर्जित करती हैं । हिंदी के लेखकों और पाठकों को स्वयं ही एक आभासी हीन भावना के दुश्चक्र से बाहर निकलकर हिंदी के इस समृद्ध, सम्पन्न, खुशहाल परिदृश्य का आनंद लेना चाहिए ।

पांचवें सत्र में “तकनीक और हिंदी” पर संवाद में माइक्रसॉफ्ट से बालेंदु शर्मा दाधीच, विज्ञापन कंपनी ओ एंड एम के नीलेश जैन , माय उपचार से रजत गर्ग और विटीफीड से विनय सिंघल ने अपने विचार एवं अनुभव साझा किए । छठे सत्र में “कमाई वाली हिंदी” पर उद्यमी डॉ.महेश चौधरी, लेखक नीलोत्पल मृणाल और फूड ब्लॉगर निशा मधुलिका ने अपनी सफलता की कहानी सुनाई ।
इसके बाद रेडियो सिटी की आरजे दिव्या ने लेखक नीलेश मिसरा से और फिल्म पत्रकार अतिका अहमद फारूकी ने निर्माता-निर्देशक अनिरुद्ध पाठक से विशेष संवाद भी किया ।
कार्यक्रम के समापन समारोह में वरिष्ठ पत्रकार श्री रामबहादुर राय , शिक्षाविद अतुल भाई कोठारी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं दयाल सिंह महाविद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री अमिताभ सिन्हा, मुख्यमंत्री,हरियाणा के मीडिया सलाहकार श्री अमित आर्य तथा मानव रचना अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव ब्रिगेडियर वी के आनंद उपस्थित रहे ।

हिंदी के इस उत्सव में हिंदी से प्रतिष्ठा अर्जित करने वाले संस्थान दिल्ली प्रेस, लेखक नीलेश मिसरा, निर्माता निर्देशक अनिरुद्ध पाठक, ब्लॉगर निशा मधुलिका, उद्यमी रजत गर्ग , महेश चौधरी और अमित भड़ाना को हिंदी गौरव सम्मान -2018 से सम्मानित भी किया गया ।