Dr. Mahendra Bhanawat

Dr. Mahendra Bhanawat

व्यक्तिगत जानकारी

भानावत वंश परंपरा :

संवत् 1835 से सुश्रावक भानाजी से भानावत वंश परंपरा प्रारंभ हुई। भानाजी के बाद क्रमश: नेणजी, झूमजी, जीतमलजी, प्रतापमलजी हुए | डॉ. महेन्द्र भानावत उस परंपरा के छठे वंशज हैं।

जन्म :

राजस्थान, उदयपुर जिले के कानोड़ कस्बे में ।3 नवम्बर 1937 | यह कस्बा उदयपुर से करीब 100 किलोमीटर दूर कानी मीणी द्वारा बसाया गया।

माता-पिता :

डेलूबाई-प्रतापमल भानावत

पुत्र-पुत्रियां :

डॉ. तुक्तक भानावत, डॉ. कविता मेहता एवं डॉ. कहानी भानावत (मेहता)

शिक्षा:

मोहनलाल सुखाड़िया वि.वि. उदयपुर से एम. ए. (हिन्दी) एवं 1968 में ‘ राजस्थानी लोकनाट्य परम्परा में मेवाड़ का गवरीनाट्य और उसका साहित्य’ विषय पर पीएच.डी. । गवरी आदिवासी भीलों द्वारा भाद्र मास में खेला जाने वाला विविध खेलों, स्वांगों तथा लीलापरक आख्यानों का मिलाजुला नृत्यानुष्ठान है । सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह 1967 में जिन पांच छात्रों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान की गई उनमें से एक ।

सेवा कार्य :

(अ) भारतीय लोककला मण्डल, उदयपुर में शोध सहायक 1958-62 | इस दौरान-

(1) राजस्थान के विभिन्न अंचलों के विविधपक्षीय लोककलाकारों के बेदला गांव में पन्द्रह-पन्द्रह दिन के चार प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन -संयोजन । इस प्रकार का यह संभवत: विश्व का पहला शिविर था। यहीं नागौर जिले के जीजोट गांव के नाथू भाट के कठपुतली दल को चिन्हित कर कलामंडल में उसकी कला-कारीगरी का बारीकी से अध्ययन किया गया तथा परंपरागत अमरसिंह राठौड़ खेल की ही भावभूमि में कलामंडल के कलाकारों द्वारा (मुगल दरबार ‘ नामक खेल की रचनाकर नवीन परिवेश दिया गया। इसी कठपुतली खेल को रुमानिया में 1965 में आयोजित तृतीय अंतर्राष्ट्रीय कठपुतली समारोह में सरकार ने भारतीय प्रतिनिधि के रूप में प्रदर्शनार्थ भेजा जहां कलामंडल के दल को विश्व का सर्वोच्च प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।

(2) राजस्थानी लोककलाओं का सर्वेक्षण योजनान्तर्गत विविध क्षेत्रों की यात्राएं।

(3) भारतीय नाट्य संघ, नई दिल्ली द्वारा प्रदत्त प्रोजेक्ट के अंतर्गत राजस्थान के लोकनाट्य विषयक शोधाध्ययन एवं रिपोर्ट लेखन।

4) मणिपुर एवं त्रिपुर की आदिवासी जीवन-संस्कृति का सर्वेक्षण-अध्ययन एवं रिपोर्ट लेखन।

(5) कलामंडल की रजत जयंती पर ‘रजन्तिका’ नामक स्मारिका का संपादन-प्रकाशन।

(6) लोककला संग्रहालय की स्थापना एवं परिकल्पना मुजब सामग्री एकत्रीकरण तथा विविध विधाओं का संग्रह-प्रकाशन।

(7) पहली पुस्तक “राजस्थान स्वर लहरी ‘ भाग एक का प्रकाशन | इसी क्रम में भाग दो तथा भाग तीन का संपादन अप्रकाशित।

(ब) साहित्य संस्थान, राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर में शोधाधिकारी 1963-67 | इस दौरान-

(1) डॉ. मोतीलाल मेनारिया के निर्देशन में महाराणा जवानसिंह लिखित पदों का चार हस्तलिखित प्रतियों के आधार पर पाठ संपादन कर ‘ब्रजराज-काव्य-माधुरी ‘ नाम से पुस्तक प्रकाशन।

(2) शोधपत्रिका त्रैमासिका का सम्पादन।

(स) भारतीय लोककला मंडल, उदयपुर में अनुसंधान अधिकारी, उपनिदेशक और फिर निदेशक 1967-95 । इस दौरान-

(1) विविध लोकधर्मी कला-विधाओं पर करीब दो दर्जन पुस्तकों का प्रकाशन।

(2) समय-समय पर राष्ट्रीय लोककला संगोष्ठियों का आयोजन।

(3) संगोष्टियों में ख्यात विद्वानों के आलेखों पर लोककला : मूल्य और संदर्भ तथा लोककला : प्रयोग और प्रस्तुति नामक दो पुस्तकों का संपादन-प्रकाशन।

(4) कठपुतली कला पर राजस्थान के अध्यापकों एवं देश-विदेश के लोगों को विविध शैलियों में प्रशिक्षण-संयोजन।

(5) यूनीसेफ द्वारा प्रदत्त प्रोजेक्ट के तहत कठपुतली कला विषयक प्रशिक्षण, नाट्य-लेखन, मंचन एवं प्रकाशन।

(6) अखिल भारतीय कठपुतली समारोहों का आयोजन।

(7) लोकानुरंजन मेलों का आयोजन।

(8) रजत जयंती समारोह का भव्य आयोजन।

(9) ‘रंगायन’ मासिक पत्र का शुभारंभ एवं संपादन।

(10) राजस्थान की विविध अकादमियों में भागीदारी एवं पत्रवाचन।

(11) ‘लोककला’ त्रैमासिक पत्रिका का पुनर्प्रकाशन एवं संपादन।

लेखन-प्रकाशन :

(1) देश-विदेश की 500 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में 9 हजार के करीब हिन्दी एवं राजस्थानी में रचनाएं प्रकाशित।

(2) लोककला-साहित्य संस्कृति एवं आदिवासी जीवनधारा विषयक 90 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित।

(3) “निर्भय मीरां’ नामक 50वीं कृति प्रकाशित । इस हेतु राजस्थान के अलावा, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश तथा तमिलनाडु की खोज यात्राएं महत्वपूर्ण रहीं।

(4) आदिवासी जीवन-संस्कृति पर लगभग एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित।

(5) राजस्थानी के लोकदेवता तेजाजी, पाबूजी, देवनारायण, ताखा-अम्बाव, काला-गोरा तथा भीली लोकनाट्य गवरी पर स्वतंत्र पुस्तकें प्रकाशित।

(6) बालसाहित्य की आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित।

डॉ. महेन्द्र भानावत को प्राप्त विशिष्ट-सम्मान एवं पुरस्कार

समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा जो सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए वे निम्नांकित हैं-

(1) 24 दिसंबर 208 को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, उदयुपर द्वारा शिल्पग्राम उत्सव के उद्घाटन अवसर पर एक लाख पच्चीस हजार रूपये का डॉ. कोमल कोठारी लोककला पुरस्कार।

(2) कोलकाता के विचार मंच द्वारा 6 दिसंबर 208 को 5 हजार रूपये का कन्हैयालाल सेठिया पुरस्कार।

(3) राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर द्वारा फेलो।

(4) उत्तरप्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ द्वारा समय-समय पर (अ) राजस्थान के थापे,

अ) राजस्थान के थापे,

(ब) मेंहदी राचणी

(स) अजूबा राजस्थान पुस्तक पर पं. रामनरेश त्रिपाठी नामित पुरस्कार।

(5) महाराणा मेवाड़ फाउण्डेशन, उदयपुर द्वारा भारतीय परिवेशमूलक लोकसाहित्य लेखन पर महाराणा सज्जनसिंह पुरस्कार ।

(6) सृजन मंच, बड़ी द्वारा स्वर्ण पदक।

(7) हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग द्वारा साहित्य वारिधि उपाधि से विभूषित।

(8) लोकसंस्कृति शोध संस्थान, चुरू द्वारा झवेरचंद मेघाणी स्मृति स्वर्ण पदक ।

(9) विनोबा संदेश, उदयपुर द्वारा रचनात्मक पत्रकारिता पुरस्कार।

(10) राजस्थान ग्रेज्युएट्स एसोसिएशन, मुंबई द्वारा भारतीय भाषाओं में चयनित श्रेष्ठ कविता- पुस्तक ‘ कोई-कोई औरत’ पुरस्कृत।

(11) जवाहर विद्यापीठ, कानोड़ द्वारा लोककला मनीषी अलंकरण।

(12) सृजन मंच, बड़ी द्वारा सृजन विभूति सम्मान।

(13) प्रसंग नर्मदा, छतरपुर द्वारा लोकसंस्कृति रत्न अलंकरण।

(14) मधुबन संस्था, भोपाल द्वारा गुरुवंदन समारोह में श्रेष्ठ कला आचार्य अलंकरण।

(15) राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर द्वारा संस्कृति सम्मान।

(16) जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय, उदयपुर द्वारा लोककला सुमेरु सम्मान।

(17) स्वर्ण रंगमंडल, इलाहाबाद द्वारा लोककला रत्न सम्मान।

(18) साहित्यांचल संस्थान, भीलवाड़ा द्वारा साहित्यांचल शिखर सम्मान।

(19) संबोधन प्रकाशन, कांकरोली द्वारा संबोधन-सहयात्री सम्मान।

(20) राष्ट्रीय फोटोग्राफी अधिवेशन, उदयपुर द्वारा लोकसंस्कृति सम्मान।

(21) सरगम कला परिषद, नाथद्वारा द्वारा साहित्य सम्मान।

(22) जवाहर जैन छात्रावास, कानोड़ द्वारा राजस्थानी काव्यधारा सम्मान।

(23) राजस्थान दिवस समारोह समिति, जयपुर द्वारा कठपुतली कला कीर्तिमान सम्मान।

(24) मरुधर लोककला केन्द्र, बाड़मेर द्वारा लोकसंस्कृति सम्मान।

(25) अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, उदयपुर द्वारा विशेष भागीदारी सम्मान।

(26 ) अखिल भारतीय श्री गणेश गुरु सेवा समिति, नई दिल्ली द्वारा ज्ञान ज्योति सारस्वत सम्मान।

(27) जवाहर जैन छात्रावास, कानोड़ द्वारा कला मनीषी सम्मान।

(28) ज्योति शिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा रजत जयंती सम्मान।

(29) सहत्त्राब्दी हिंदी सम्मलेन, नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय हिंदी-सेवी स्वर्ण सम्मान।

(30) मेवाड़ा गायरी महासभा एवं मालव लोकसंस्कृति परिषद, उज्जैन द्वारा श्री देवनारायण लोकसंस्कृति सम्मान।

(31) रोटरी क्लब, उदयपुर द्वारा वरिष्ठ नागरिक सम्मान।

(32) दंडी स्वामी मोहनानंद, उदयपुर द्वारा स्वस्ति सम्मान।

(33) सौर वैधशाला, उदयपुर द्वारा हिंदी-सेवी सम्मान।

(34) अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ, बीकानेर द्वारा विद्वत् सम्मान।

(35) बीएसएनएल, उदयपुर द्वारा हिंदी-सेवी सम्मान।

(36) राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयुपर द्वारा अमृत सम्मान।

(37) राष्ट्रीय साहित्य कला और संस्कृति परिषद, हल्दीघाटी द्वारा महाकवि कालिदास राष्ट्रीय सम्मान ।

(38) श्री द्वारका सेवा-निधि, जयपुर द्वारा एडोल्फ-माग्दालेना हैनी सम्मान।

(39) शाकुन्तलम संस्थान, उदयपुर द्वारा लोककला सम्मान।

(40) साहित्य मंडल, नाथद्वारा द्वारा श्री भगवतीप्रसाद देवपुरा सम्मान।

(41) दी अमेरिकन बायोग्राफीकल इंस्टीट्यूट द्वारा रिसर्च बोर्ड ऑफ एडवाइजरी सम्मान।

(42) भारतीय लोककला मंडल, उदयपुर द्वारा रजत जयंती रजत पदक सम्मान।

43) बंबोरा में आयोजित कन्हैयालाल धींग तथा उमरावबाई धींग राजस्थानी साहित्य एवं साहित्योदय पुरस्कार समारोह में विशिष्ट अतिथि। रविवार 28 मई 2017

विशिष्ट व्याख्यान एवं अभिभाषण :

(1) भारत भवन, भोपाल द्वारा भक्तिकाल में मीरांबाई का स्थान विषय पर विशिष्ट व्याख्यान एवं अध्यक्षता।

(2) सांस्कृतिक स्तोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र, उदयपुर द्वारा आदिवासी परंपरा, परिवेश एवं चुनौतियां विषय पर गांधीनगर एवं उदयपुर में विशिष्ट व्याख्यान।

(3) राजस्थान ललित अकादमी, जयपुर द्वारा भारतीय कला जगत पर राजस्थानी लोककलाओं का प्रभाव विषय पर विशिष्ट व्याख्यान।

(4) भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता द्वारा आयोजित राजस्थान के लोकगीतों में वसुधैव कुट्ुम्बकम का भाव-बोध विषय पर विशेष व्याख्यान।

(5) मीरां स्मृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में मीरांबाई : नवीन खोज-दृष्टि विषय पर विशेष व्याख्यान।

(6) राजस्थान साहित्य अकादमी द्वारा अन्तर्प्रातीय बंधुत्व यात्रान्तर्गत भारत भवन भोपाल में साहित्यकार-मिलनोत्सव में भागीदारी ।

(7) साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा कोलकाता में आयोजित राजस्थानी भाषा एवं लोकधर्मिता संगोष्ठी में भागीदारी ।

(8) राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में राजस्थान का रंगधर्मी वैविध्य पर पत्र-वाचन।

(9) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली द्वार आयोजित राष्ट्रीय कला संगोष्ठी में मांडणी कला पर विशेष भागीदारी ।

(10) टीआरआई, उदयपुर द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी में आदिवासी जीवनधारा और चुनौतियों पर विशेष वक्तव्य।

(11) अलर्ट संस्थान, उदयपुर द्वारा गोगुन्दा में आयोजित शिविर में आदिवासी जीवन संस्कृति के रखरखाव पर विशेष वक्तव्य एवं अध्यक्षता।

(12) पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में सांस्कृतिक उन्नयन और लोकधारा विषय पर भागीदारी ।

(13) एन्श्रोपोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, उदयपुर द्वारा आयोजित आदिवासी संस्कृति के रखरखाव पर विशेष अभिभाषण।

(14) महाराणा प्रताप स्मारक समिति, उदयपुर द्वारा आयोजित मीरांबाई विषयक संगोष्ठी में उद्बोधन।

विशिष्ट प्रकाशन :

(1) गोयल प्रकाशन, उदयपुर से मेंहदी पर ‘ मेंहदी राचणी ‘, मांडणों पर ‘ मरवण मांडे मांडणा ‘ तथा लोकगीतों पर “काजल भरियो कूंपलो ‘ एवं ‘मोरिया आछो बोल्यो’ का पर्यटन साहित्य के रूप में प्रकाशन।

(2) पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर से “राजस्थान के लोकनृत्य ‘, “गुजरात के लोकनृत्य’ तथा “महाराष्ट्र के लोकनृत्य’ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन।

(3) देवस्थान विभाग राजस्थान, उदयपुर से “राजस्थान के लोक देवी-देवता ‘ पुस्तक का लेखन-प्रकाशन।

(4) आदिवासी लोककला परिषद, भोपाल द्वारा ‘पाबूजी की पड़’ तथा ‘पांडवों का भारत’ पुस्तकों का लेखन-प्रकाशन।

(5) जवाहर कला केन्द्र, जयपुर द्वारा “’लोककलाओं का आजादीकरण!’ पुस्तक-प्रकाशन।

(6) ट्राईबल रिसर्च इन्स्टीट्यूट, उदयपुर द्वारा ‘उदयपुर के आदिवासी ‘ तथा ‘ कुंवारे देश के आदिवासी ‘ पुस्तकों का प्रकाशन।

(7) साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा राजस्थानी में ‘कविराव मोहनसिंह’ पुस्तक- प्रकाशन।

(8) नारायण सेवा संस्थान, उदयपुर द्वारा ‘मसखरी ‘ पुस्तक-प्रकाशन।

सदस्य-मनोनयन :

राजस्थान सरकार द्वारा निम्नांकित साहित्य एवं कला-संस्थानों में सदस्य मनोनीत-

(1) पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र उदयपुर।

(2) राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर।

(3) राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, जोधपुर।

(4) जवाहर कला केंद्र, जयपुर।

(5) राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर।

पत्र-संपादन :

निम्नांकित पत्र-पत्रिकाओं का संपादन-

(१) रंगायन

(2) लोककला

(3) पर्यटन दिग्दर्शन

(4) शोध पत्रिका

(5) पीछोला

(6) रंगयोग

(7) ट्राईब

(8) सुलगते प्रश्न

संवाददाता :

दैनिक हिन्दुस्तान, नई दिल्ली का उदयपुर क्षेत्रीय संवा प्रेषण ( 1970-95)

स्तंभ-लेखन :

निम्नलिखित दैनिक, साप्ताहिक एवं पाक्षिक पत्रों में स्तंभ लेखन-

(1) जय राजस्थान दैनिक, उदयपुर में ‘चलते-चलते’ (1974-2000)

(2) दैनिक जलते दीप, जोधपुर में ‘ओलखाण ‘ (1980-84 ) (राजस्थानी)

(3) मनु टाइम्स साप्ताहिक, उदयपुर में ‘ लो सुनो” (1988-89)

(4) जनसत्ता दैनिक , मुंबई में “मेवाड़ की चिट्ठी” (1988-90) (राजस्थानी)

(5) चौथा संसार दैनिक, इन्दौर में ‘ भाषा भगिनी राजस्थानी ‘ (1989-90)

(6) मनु टाइम्स दैनिक, उदयपुर में ‘इसी बहाने’ (1990-94 )

(7) सुमन लिपि, मुंबई में ‘लोकसंस्कृति’ (1997-99)

(8) प्रतिदिन दैनिक, उदयपुर में ‘कभीकभार ‘ (1997-98)

(9) दैनिक भास्कर, उदयपुर में “जानिए शहर को ‘ (2005-06)

(10) उदयपुर दोपहर में ‘ अटली-मटली ‘ (2013-14 ) (राजस्थानी)

(11) पब्लिक पड़ताल साप्ताहिक, उदयपुर में “गांव की गंध” (2013 से निरंतर)

(12) शब्द रंजन पाक्षिक, उदयपुर में ‘ स्मृतियों के शिखर” (2016 से निरंतर )

पाठ्य-पुस्तकों में भागीदारी :

(1) समय-समय पर एसआईईआरटी, उदयपुर द्वारा पाठ्य-पुस्तकों के लिए राजस्थानी तथा हिंदी में पाठ-लेखन।

(2) एनसीईआरटी में आयोजित कार्यशाला में भागीदारी एवं पाठ-लेखन।

(3) एनएसडी में आयोजित कार्यशाला में भागीदारी ।

अभिनंदन एवं स्मृतिग्रंथ संपादन :

(1) पद्मश्री देवीलाल सामर अभिनंदन ग्रंथ ।

(2) काकोसा केसरीमल सुराणा अभिनंदन ग्रंथ

(3) पं. उदय जैन अभिनंदन ग्रंथ।

(4) राष्ट्रसंत गणेशमुनि शास्त्री अभिनंदन ग्रंथ ‘ आस्था के आयाम !’।

(5) जिनेन्ध मुनि अभिनंदन ग्रंथ ‘स्वर्ण पथ का संत’।

(6) सुश्रावक गोकुलचंद पीतलिया अभिनंदन ग्रंथ ‘गोकुल गौरव ‘।

(7) डॉ. नरेन्द्र भानावत स्मृति ग्रंथ ‘नमन’।

(8) पं. उदय जैन स्मृति ग्रंथ।

(9) देवीलाल सामर रंगायन स्मृति अंक।

(10) कमलाकुमारी पीतलिया स्मृति ग्रंथ “कर्मशीला कमलाजी ‘।

(11) भारतीय लोककला मंडल की रजत जयंती पर प्रकाशित ‘ रजन्तिका’।

विशिष्ट देन:

( अ) लोकसाहित्य-संस्कृति-कला के अछूते एवं अज्ञात विषयों पर सर्वाधिक लेखन एवं प्रकाशन के फलस्वरूप 50 से अधिक शोध-छात्रों ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की तथा अनेक लोगों को उच्च अध्ययन विषयक प्रारूप-प्रोजेक्ट के तहत मार्गदर्शन।

(ब ) भारत सरकार द्वारा संचालित सांस्कृतिक स्त्रेत्र एवं प्रशिक्षण केन्द्र उदयपुर द्वारा पिछले 20 वर्षों से देश के विभिन्न अंचलों से आने वाले अध्यापकों को लोकधर्मी साहित्य संस्कृति पर व्याख्यान।

( स ) देश-विदेश के एक हजार से अधिक व्यक्तियों को शोध-विषयों से संदर्भित मार्गदर्शन।

(द ) विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा प्रस्तुत शोधप्रबंधों का मूल्यांकन एवं मौखिकी- परीक्षण ।

(य ) आकाशवाणी तथा दूरदर्शन केंद्रों से गत 40 वर्षों से साहित्य एवं लोकधर्मी विविध विधाओं पर आलेख, संस्मरण, परिचर्चा तथा काव्यपाठ।

संस्थापक संस्थाएं :

(1 ) कानोड़ मित्र मंडल

( 2 ) मुक्तक प्रकाशन

(3 ) मंगल मुद्रण

(4 ) पार्श्वकल्ला

( 5 ) शब्द रंजन पाक्षिक

अधिस्वीकृत पत्रकार :

राजस्थान सरकार द्वारा स्वतंत्र पत्रकार के रूप में अधिस्वीकृति (2003 से निरंतर)

सम्प्रति :

स्वतंत्र लेखन एवं शोध निर्देशन।

स्थायी पता :

निवास : 352, श्रीकृष्णपुरा, सेंटपॉल स्कूल के पास, उदयपुर-3300]

फोन : (0294) 242474

कार्यालय : 3-74, म्युनिसिपल शॉप, चेतना होटल के पास, चेतक सर्कल, ‘डदयपुर-3300]

फोन : (0294) 242929

मोबाइल : +91935609040